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कोरोना वैक्सीन पर मुक़दमों से बचाव क्यों चाहते हैं पूनावाला?

कोरोना वैक्सीन पर मुक़दमों से बचाव क्यों चाहते हैं पूनावाला?

कोरोना वैक्सीन के ट्रायल में दुष्परिणाम के बाद जिस सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया पर केस किया गया था उस कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला ने सरकार से अब क़ानूनी मामलों से बचाव का आग्रह किया है।

कोरोना वैक्सीन के ट्रायल में दुष्परिणाम के बाद जिस सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया पर केस किया गया था उस कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला ने सरकार से अब क़ानूनी मामलों से बचाव करने को कह रहे हैं। पूनावाला ने कहा है कि सरकार को वैक्सीन बनाने वालों को 'फालतू मुक़दमों' से बचाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि ऐसे मुक़दमों से कंपनियों का ध्यान भटकता है और आख़िरकार वैक्सीन बनाने वाली कंपनियाँ दिवालिया हो जाएँगी। यह बात वैक्सीन बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी के सीईओ तब कह रहे हैं जब उनकी कंपनी पर आरोप लगा है कि उनकी वैक्सीन से चेन्नई का एक वॉलिंटियर 'मानसिक तौर पर दिवालिया' हो गया है। 

वॉलिंटियर ने दावा किया है कि ट्रायल में वैक्सीन के इंजेक्शन के बाद उसे गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी हो गई और इसलिए उसने 5 करोड़ रुपये के मुआवजे की माँग की है। 

ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्रेज़ेनेका की वैक्सीन के लिए क़रार करने वाली कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया है। कंपनी ने भारत में वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल आयोजित किया। इस ट्रायल में चेन्नई के 40 वर्षीय व्यक्ति भी शामिल हुए थे और उन्हें 1 अक्टूबर को चेन्नई के श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ़ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च में वैक्सीन लगाई गई थी।

उस 40 वर्षीय वॉलिंटियर ने 21 नवंबर को क़ानूनी नोटिस दिया था। इसके अनुसार, दस दिन बाद उन्हें 'गंभीर सिरदर्द', 'व्यवहार में आमूल परिवर्तन' और 'रोशनी और आवाज़ से दिक्कतों' का अनुभव होने लगा। नोटिस में दावा किया गया है कि इसके बाद वह न तो किसी को पहचान सकते थे और न ही किसी से बोल सकते थे।

वॉलिंटियर के नोटिस के अनुसार उन्हें बताया गया कि वह 'एक्यूट एन्सेफ़ैलोपैथी' से पीड़ित हैं। 26 अक्टूबर को उनको अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। नोटिस में दावा किया गया है कि 'टेस्ट वैक्सीन का ही वह दुष्प्रभाव था...'।

नोटिस में यह भी कहा गया है कि वॉलिंटियर को मुहैया कराई गई पार्टिसिपेंट इंफ़ोर्मेशन शीट के अुनसार, 'इंग्लैंड में 18 से 55 साल के 500 स्वस्थ वयस्क लोगों पर इसका ट्रायल किया गया और यह सुरक्षित है।' नोटिस में कहा गया है कि इसी आधार पर वॉलिंटियर ने विश्वास कर ट्रायल में हिस्सा लिया। 

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तब यह मामला आने के बाद सीरम इंस्टिट्यूट ने कहा था कि वह उस वॉलिंटियर के ख़िलाफ़ 100 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा करेगा। कंपनी की ओर से 'एनडीटीवी' को दिए गए बयान में दावा किया गया था, 'यह दावा दुर्भावनापूर्ण है क्योंकि वॉलिंटियर को विशेष रूप से चिकित्सा टीम द्वारा सूचित किया गया था कि उन्हें जो जटिलताएँ हुईं उसका ट्रायल से कोई संबंध नहीं था। विशेष रूप से इसके बारे में जानने के बावजूद उन्होंने सार्वजनिक तौर पर बताने और कंपनी की प्रतिष्ठा को नुक़सान पहुँचाने की राह चुनी।'

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फ़ोटो साभार: ट्विटर/अदार पूनावाला

अब अदार पूनावाला ऐसे किसी मुक़दमों से सुरक्षा चाहते हैं। पूनावाला ने ग्लोबल टेक्नोलॉजी समिट 2020 में कहा, 'सरकार को निर्माताओं, विशेष रूप से वैक्सीन निर्माताओं को सभी तरह के मुक़दमों से सुरक्षा देने की ज़रूरत है। वास्तव में कोवाक्स और अन्य देशों ने पहले से ही इस बारे में बात करना शुरू कर दिया है। ऐसा हो रहा है कि फालतू दावे सामने आते हैं, और आप देखते हैं कि मीडिया में बात का बतंगड़ बन जाता है...। इसको दूर करने के लिए सरकार को दखल देने की ज़रूरत है...।'

पूनावाला ने कहा कि वैक्सीन निर्माताओं को अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने की ज़रूरत है और 'फालतू मुक़दमे' उन्हें 'दिन भर विचलित कर सकते हैं'। उन्होंने कहा कि ऐसे मुकदमों से अंततः वैक्सीन बनाने वाले दिवालिया हो सकते हैं।

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