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अडानी एंटरप्राइजेज ने एफपीओ वापस लिया; अब आगे क्या?

अडानी एंटरप्राइजेज ने एफपीओ वापस लिया; अब आगे क्या?

हिंडनबर्ग रिसर्च के बाद शेयर बाज़ार में शेयरों के दाम धड़ाम गिरने के बीच अडानी एंटरप्राइजेज ने आख़िर अपना एफ़पीओ वापस क्यों लिया? जानिए अब निवेशकों के पैसे का क्या होगा।

अडानी एंटरप्राइजेज के बोर्ड ने बुधवार को अपने पूरी तरह सब्सक्राइब्ड फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर यानी एफपीओ को वापस लेने का फ़ैसला किया है। कंपनी ने एक बयान में कहा है कि वह निवेशकों का उनका पैसा वापस कर देगा।

अडानी एंटरप्राइजेज के बोर्ड का यह फ़ैसला तब आया है जब आज यानी बुधवार को ही इस कंपनी के शेयर में 794.15 रुपये यानी 26.70 फ़ीसदी की गिरावट आई है। कंपनी के एक शेयर का दाम अब 2179.75 रुपये रह गया है। जबकि एफ़पीओ के लिए शेयर का दाम क़रीब 3200 रुपये निर्धारित किया गया है। 

अडानी समूह की फर्मों के शेयरों में बुधवार को भी गिरावट आई। न्यूयॉर्क स्थित निवेशक अनुसंधान फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद पिछले पांच कारोबारी सत्रों में समूह का 7 लाख करोड़ से अधिक का नुक़सान हुआ है। हिंडनबर्ग रिसर्च ने उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनियों पर स्टॉक में हेरफेर और लेखा धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। हालाँकि अडानी ने इन आरोपों को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि यह उसको बदनाम करने के लिए किया गया है।

हिंडनबर्ग अमेरिका स्थित निवेश रिसर्च फर्म है जिसे एक्टिविस्ट शॉर्ट-सेलिंग में महारत हासिल है। रिसर्च फर्म ने कहा है कि उसकी दो साल की जांच में पता चला है कि अडानी समूह दशकों से 17.8 ट्रिलियन (218 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के स्टॉक के हेरफेर और एकाउंटिंग की धोखाधड़ी में शामिल था।

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में कैरेबियाई देशों, मॉरीशस और संयुक्त अरब अमीरात तक फैले टैक्स हैवन देशों में कथित तौर पर अडानी परिवार के नियंत्रण वाली मुखौटा कंपनियों के नेक्सस का विवरण दिया गया है। इसके बारे में दावा किया गया है कि इनका इस्तेमाल भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और करदाताओं की चोरी को सुविधाजनक बनाने के लिए किया जाता है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि हमने अपनी रिसर्च में अडानी समूह के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों सहित दर्जनों व्यक्तियों से बात की, हजारों दस्तावेजों की जांच की और इसकी जांच के लिए लगभग आधा दर्जन देशों में जाकर साइट का दौरा किया।

यह रिपोर्ट अडानी समूह के प्रमुख अडानी एंटरप्राइजेज की 20,000 करोड़ रुपये की फॉलो-ऑन शेयर बिक्री से पहले आई। समूह का फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर यानी एफपीओ 31 जनवरी को बंद हो गया और यह पूरी तरह सब्सक्राइब्ड था।

लेकिन इस बीच अब अडानी एंटरप्राइजेज ने अचानक एफ़पीओ को रद्द करने का फ़ैसला ले लिया है। इसने एक बयान में कहा, 'अभूतपूर्व स्थिति और मौजूदा बाजार की अस्थिरता को देखते हुए कंपनी का लक्ष्य एफपीओ की रक़म वापस करके और लेनदेन को वापस लेकर अपने निवेश समुदाय के हितों की रक्षा करना है।"

गौतम अडानी ने कहा, 'आज बाजार अभूतपूर्व रहा है, और दिन के दौरान हमारे शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव आया है। इन असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए कंपनी के बोर्ड ने एफपीओ के साथ आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया है।'

बहरहाल, एफ़पीओ को वापस लेने के अडानी एंटरप्राइजेज के फ़ैसले को कंपनी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। क्या इस झटके से कंपनी जल्द उबरेगी? और क्या कंपनी के इस फ़ैसले से निवेशकों का विश्वास लौटेगा और ज़्यादा मज़बूत होगा? यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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